औपनिवेशिक रीवाज आज भी भारत में दोहराई जाती है

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यह बात उन दिनों की है जब हाउस ऑफ लॉर्ड्स का ही सत्ता पर प्रभाव हुआ करता था, क्योंकि यह राजा और रानी के काफी नजदीक हुआ करते थे. अतः इनके द्वारा कही गई सारी बातें लगभग मान ली जाती थी परंतु समय चलते आम लोगों ने भी अपनी बातें राजा रानी तक रखनी शुरू कर दी और इसके लिए बना हाउस ऑफ कॉमंस। राजा रानी के दरबार में हाउस ऑफ कॉमंस की बातों को रखने वाले को स्पीकर कहा जाता था, यह बात अक्सर हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्यों को नागवार गुजरती थी और वह 3-4 स्पीकर्स की हत्याएं करवा चुके थे, अतः स्पीकर्स काफी डरे रहते।अतः यह आम बात हो गई कि जब तक राजा रानी की दरबार पूरी तरह से बैठ ना जाए तब तक हाउस ऑफ कामंस का स्पीकर छिपकर किसी गांव में बैठा रहता। बाद में दरबार के ही लोग सुरक्षा के साथ उसे राजा रानी के सामने लेकर आते और तब वह हाउस ऑफ कॉमंस में की पूरी बातें कह सकता था. हास्यास्पद है की यह औपनिवेशिक रीवाज आज भी भारत में दोहराई जाती है, और इस स्पीकर को छुपा कर सबके सामने लाया जाता है. हालांकि अब ऐसी ना जाने  कितने रिवाजों के टूटने की प्रक्रिया लगातार और तेजी से शुरु हो गई है.

चलता-फिरता ग्रीनहाउस प्रोटोटाइप

IAS SARTHAK LUCKNOW

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चलता-फिरता ग्रीनहाउस तैयार किया है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी मदद से मंगल या चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ताजा भोजन और ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा सकती है। वैज्ञानिकों ने ग्रीनहाउस का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाया सकता है। इसे हवा भरकर तैयार किया जाता है। यह इस तरह से बनाया गया है कि इसमें पौधे विकसित हो सकते हैं और अनाज का उत्पादन भी किया जा सकता है। इसमें दूषित जल एवं कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी है। फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक रे ह्वीलर ने कहा, 'इस व्यवस्था में पौधे भोजन बनाने और ऑक्सीजन मुक्त करने के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल करते हैं।' यह उसी तरह काम करता है, जैसे धरती पर पौधे प्रकाश संश्लेषण करते हैं। रे ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं, जिसे ग्रीनहाउस में भेज दिया जाता है। यहां पौधे ऑक्सीजन बनाते हैं। वैज्ञानिक पहले भी अंतरिक्ष में अनाज पैदा करने के तरीके विकसित कर चुके हैं। नई व्यवस्था सुदूर अंतरिक्ष में लंबे समय तक टिकने में सक्षम है।

अंटार्कटिका की ब्लड फॉल्स मिस्ट्री साल्व्ड

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भूवैज्ञानिकों ने आखिरकार अंटार्कटिका के 'ब्लड फॉल्स' के पीछे के  सच खुलासा किया है मैकमुर्डो ड्राई वैली में स्थित, फॉल्स को 1911 में शोधकर्ताओं द्वारा खोजा गया, अलास्का फेयरबैंक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा नए शोध ने एक अलग संभावना का सुझाव दिया है।

पानी में लाल रंग कैसे होता है?

शोध के अनुसार, लाल रंग उच्च लोहे के खनिज नमक पानी या नम में भंग होने पर लोहे के ऑक्सीकरण से  उत्पाद होता है। जब यह पानी ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो ऑक्सीकरण की प्रक्रिया होती  है जो उज्ज्वल लाल रंग को प्रदान करती है। (यह वही प्रक्रिया है जिसके द्वारा हवा को उजागर किया जाता है।) अनुसंधान टीम ने ग्लेशियर के नीचे से इमेजिंग का उपयोग रेडियो-इको ध्वनि या आरईसी नामक एक तकनीक का उपयोग किया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि खारा पानी घनत्व में अंतर को दर्शाता है जो अंततः ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को उजागर करने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

यह पाया गया कि नमकीन, जो कि एक झील थी जो ग्रेट टेलर ग्लेशियर के नीचे बहती थी, नदियों तक पहुँचने में  15 लाख साल लगते थे। नमकीन पानी के नीचे स्थित खनिजों को निकला गया है और ग्लेशियर की सतह को फिक्स्चर के माध्यम से आगे बढ़ता है।

एक और दिलचस्प अंतर्दृष्टि माइक्रोबियल जीवों की मौजूदगी है जो इन खारी नदियों में निचले स्थान पर ऑक्सीजन के साथ रहते हैं और अलगाव में जीवित रहते हैं। यह कठोर वातावरण में अनुकूलन के साक्ष्य के रूप में काम कर सकता है

स्पाइडर मिसाइल का सफल परीक्षण

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भारत ने कम दूरी की त्वरित प्रतिक्रिया मिसाइल परीक्षणों की श्रृंखला के तहत सतह से हवा में मार करने में सक्षम स्पाइडर मिसाइल का 11 मई 2017 को सफल परीक्षण किया. वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के विभिन्न मापदंडों की पुष्टि करने हेतु यह परीक्षण किया गया.स्पाइडर मिसाइल का चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज के लांच कॉम्प्लेक्स से मोबाइल लॉंचर के माध्यम से परीक्षण किया गया. मिसाइल ने चालक रहित विमान को लक्षित किया.

  • स्पाइडर मिसाइल कम समय में फायर एवं वायु में शत्रु पर हमला करने हेतु निर्माण की गई है.
  • यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है.
  • स्पाइडर मिसाइल इस्राइल से आयातित मिसाइल प्रणाली है.
  • कम ऊंचाई में इसकी मारक क्षमता 15 किलोमीटर तक है.
  • यह भारत में निर्मित सतह से हवा में मार करने में सक्षम आकाश मिसाइल से छोटी है. आकाश की मारक क्षमता 25 किलोमीटर है.

इज़राइल से अन्य सौदे-भारतीय सेना के लिए इज़राइल के साथ स्पाइक एंटी टैंक मिसाइल्स और नेवी के लिये बराक-8 एयर मिसाइल्स की डील अगले दो माह में पूरी हो सकती है. यह सौदा लगभग डेढ़ बिलियन डॉलर का होगा, जिसके बाद भारत के बेडे़ में लगभग 8000 मिसाइलें आयेंगी.मोदी का जुलाई में इज़राइल दौरा-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई में इजराइल दौरे पर जाएंगे. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला इजराइल दौरा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर काफी बड़े रक्षा समझौते होने की संभावना हैं. इस दौरे पर एंटी टैंक मिसाइल्स और नेवल एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद की डील हो सकती है. भारत इजराइल का सबसे बड़ा हथियार आयातक है.

‘वन रूपी क्लीनिक’ का शुभारम्भ

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सेंट्रल रेलवे और 'मैजिक दिल' ने संयुक्त रूप से 11 मई 2017  को घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर वन रुपी क्लीनिक शुरू किया. ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्री अब सिर्फ एक रुपया देकर रेलवे स्टेशन पर ही अपना इलाज करवा सकते हैं.

  • आगामी माह मध्य और हार्बर लाइन के 18 अन्य स्टेशनों पर इसका शुभारम्भ किया जाएगा.
  • यहां मरीजों को आपात सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध होंगी.
  • एक रुपये का ओपीडी पेपर लेकर मरीज एमबीबीएस और एमडी डॉक्टर से इलाज करा सकते हैं.
  • वन रुपी क्लीनिक के तहत मरीजों को रियायती दर पर दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.
  • मध्य रेलवे पर रोज 38 लाख यात्री सफर करते हैं. इस पहल के जरिए यात्रियों सहित आम जनता भी लाभान्वित हो सकती है.

ब्रैंडेड दवाओं में छूट-

  • पैथोलॉजिकल टेस्ट पर 20-25 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी.
  • वन रुपी क्लीनिक पर कार्डियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ और नेत्र रोग विशेषज्ञ भी मौजूद होंगे.
  • अधिक से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों को क्लिनिक पर लाने हेतु
  • वन रुपी क्लीनिक प्रबंधन द्वारा सरकारी अस्पतालों से बातचीत की जा रही है.
  • वन रुपी क्लीनिक पर मरीजों हेतु ओपीडी सुविधा 12 घंटों के लिए होगी.
  • वन रुपी क्लीनिक ओपीडी सुबह 9 बजे शुरू की जाएगी, जो रात्रि 9 बजे तक चलेगी.

सेंट्रल रेलवे से प्रतिदिन लाखों यात्री सफर तय करते है. कई बार यात्रा के दौरान हादसा भी हो जाता है और घायलों को इलाज के लिए करीब के हॉस्पिटल ले जाना पड़ता है. ऐसे में इस पहल के माध्यम से घायल यात्रियों का प्राथमिक इलाज स्टेशन पर ही हो सकेगा. वन रुपी क्लीनिक के तहत मरीजों को जो दवाएं दी जाएंगी उनमे अधिकतर जेनेरिक दवाएं ही होंगी. ब्रांडेड दवाइयों पर भी डिस्काउंट प्रदान किया जाएगा.

भारत-श्रीलंका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

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श्रीलंका, भारत के निकटतम समुद्री पड़ोसी देश है और क्षेत्रीय सीमा से सिर्फ 30 समुद्री मील दूर है। इस द्वीप राष्ट्र के साथ भारत के गहन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। हम भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग के क्षेत्रों का विश्लेषण करते हैं। आप दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दों के बारे में भी सीख सकते हैं।

श्रीलंका में तमिल और सिंहली दो प्रमुख जातीय समूह हैं स्वतंत्रता से पहले तमिलों के साथ सिंहली का शाश्वत संघर्ष कर रहा था। कई तमिलों ने अंग्रेजी भाषा सीखी, जो औपनिवेशिक काल में उच्च शिक्षा और बेहतर रोजगार के लिए आवश्यक थी। और तमिल-वर्चस्व वाले उत्तरी प्रांत में शिक्षा और रोजगार के मामले में अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएं थीं। स्वतंत्रता के बाद सिंहली राष्ट्रवाद ने शिक्षा और नागरिक प्रशासन में तमिल उपस्थिति को रोकने की मांग की। 1949 में भारतीय तमिल वृक्षारोपण श्रमिकों से वंचित नहीं हुए, सिंहली राष्ट्रवाद की एक लहर की शुरुआत जो इस क्षेत्र में तमिल लोगों से अलग थी. 1972 के संविधान में सिंहली भाषा और बौद्ध धर्म के पक्ष में संवैधानिक प्रावधान, उनकी शैक्षिक नीतियों के साथ-साथ कई तमिलों को आश्वस्त किया गया था कि उन्हें एक सीमांत समुदाय के रूप में माना जायेगा। खुले भेदभाव के परिणामस्वरूप, 1976 में तमिल अधिकारों के  लड़ने के लिए 1976 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) का गठन किया गया और 1983 में गृहयुद्ध शुरू हुआ।

 

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार (श्रीलंका)

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उल्लेखनीय है कि श्रीलंका अपने ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सुधार करने जा रहा है| इसका ध्यान मुख्यतः नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित है जोकि भारत के लिये एक सुनहरा अवसर है| विदित हो कि श्रीलंका के पास पहले से ही मौज़ूद 4,000 मेगावाट क्षमता में पवन और सौर ऊर्जा का योगदान मात्र 550 मेगावाट है; परन्तु इसकी नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी में वृद्धि हो रही है| परियोजना (जिसकी अनुमानित विद्युत उत्पादन क्षमता 5,000 मेगवाट है), देश में प्रत्येक स्थान पर 1 मेगावाट क्षमता वाले 60 सौर ऊर्जा संयंत्रों के वितरण के लिये बनाया गया कार्यक्रम, 100 मेगावाट क्षमता के अन्य सौर ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं| मन्नार की पवन विद्युत् परियोजना को सरकारी स्वामित्व वाली सुविधा सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (Ceylon Electricity Board) द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में लिया जाएगा और ऊर्जा संयंत्र का निर्माण करने के लिये एक वैश्विक टेंडर भी निकाला जाएगा, यह 100 मेगावाट क्षमता का संयंत्र श्रीलंका के 375 मेगावाट क्षमता वाले कार्यक्रम का एक भाग है जिसमें उत्पादन की भविष्यवाणी तथा उसका प्रबंधन करने के लिये नवीकरणीय ऊर्जा का एक केंद्र भी होगा| भारत -श्रीलंका के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक अच्छा प्रभाव है| इसके भारतीय सहायक के माध्यम से स्पेनिश विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर (Spanish wind turbine manufacturer) श्रीलंका के लोगों के लिये 76 मेगावाट क्षमता वाले पवन ऊर्जा संयंत्र को स्थापित कर चुका है गेमेसा(Gamesa) ने भी कुछ समय पहले ही हंबनटोटा के निकट 20 मेगावाट के सोलर संयंत्र का निर्माण कार्य पूरा किया है| यह देश का पहला व्यापक सुविधाओं वाला सौर ऊर्जा संयंत्र है| पवन टरबाइन विनिर्माता सुजलोन(Suzlon )और रेगेन पॉवरटेक(ReGen Powertech) ने भी इसके लिये अपने उपकरणों का विक्रय कर दिया है| श्री लंका सोलर और पवन ऊर्जा दोनों के लिये अनुकूल है| इसके पश्चिमी किनारे पर अवस्थित कल्पतिया(Kalpatiya) और पुट्टलम(Puttalam) पवन ऊर्जा फ़ार्म के लिये पवन की गति 8 मीटर प्रति सेकण्ड है| इसी प्रकार हंबनटोटा में एक मेगावाट सौर ऊर्जा से 2.2 मिलियन किलो वाट घंटा विद्युत का उत्पादन होता है|

पशु बिक्री पर प्रतिबंध

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पर्यावरण और वन मंत्रालय के नए नियमों के तहत कत्तों और मवेशियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हैं। गाय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय विनियमन हिंदु जागरूक समूहों द्वारा गाय व्यापारियों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों की पृष्ठभूमि में अधिसूचित किया गया है। नियम 1960 के पशु अधिनियम क्रूरता की रोकथाम के तहत अधिसूचित किया गया है। उत्तर-पूर्व भारत और केरल के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में गायों की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए नियमों को अगले तीन महीनों में लागू किया जाएगा। भारत भर में मुख्य हाइलाइट्स, मवेशी व्यापार को केवल कृषि भूमि मालिकों के बीच ही अनुमति है। मवेशी केवल ऐसे व्यक्ति को बेचा जा सकता है जो दस्तावेजों को रखता है कि वह एक कृषक है नए नियमों के मुताबिक, खरीदे गए मवेशियों को छह महीने के भीतर फिर से नहीं बदला जा सकता है। पशु बाजारों को एक अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किमी के भीतर और राज्य सीमा से 25 किलोमीटर तक नहीं बनाया जा सकता। देश के बाहर पशुओं को परिवहन के लिए राज्य सरकार के नामांकित व्यक्ति की विशेष अनुमोदन की आवश्यकता होगी सभी पशु बाजारों को एक मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला पशु बाजार समिति के अनुमोदन से चलाना होगा। समिति में सरकार के अनुमोदित पशु कल्याण समूहों के दो प्रतिनिधि भी होंगे। पशु चिकित्सा सुविधा और बीमार जानवरों के लिए अलग-अलग बाड़े जैसे पशु कल्याण के लिए लगभग 30 मानदंड निर्धारित हैं। जानवरों के मालिक को इसकी लागत सहन करना पड़ता है एक आश्रय में रख-रखाव मामले में, मालिक  भुगतान करने में असमर्थ होता है, लागत भूमि बकाया के रूप में वसूल की जाएगी। राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को लागतों को निर्दिष्ट करेगी।

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