जैव ईंधन राष्ट्रीय नीति - 2018

SARTHAK IAS
नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 200 9 में तैयार की गई नीति का लक्ष्य वैश्विक स्तर पर बढ़ते विकास के बीच भारत में जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नई नीति, गन्ना के रस, शक्कर युक्त सामग्री जैसे चीनी चुकंदर, मिठाई ज्वारी, और स्टार्च युक्त सामग्री जैसे मकई, कसावा, क्षतिग्रस्त भोजन का उपयोग करके इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के दायरे को फैलाती है। गेहूं, टूटे चावल, और सड़े हुए आलू जैसे अनाज, इथेनॉल उत्पादन के लिए मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त।
यह नीति उत्पाद के लिए अपर्याप्त कीमतों में शामिल को भी ध्यान में रखती है, और इसलिए राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी के साथ पेट्रोल के साथ मिश्रण के लिए इथेनॉल के उत्पादन के लिए अधिशेष अनाज के उपयोग की अनुमति देती है।
उन्नत जैव ईंधन पर जोर देने के साथ, पॉलिसी छह साल में 5000 करोड़ रुपये की 2 जी इथेनॉल बायोरेफाइनरी के लिए एक व्यवहार्यता अंतर निधि योजना, अतिरिक्त कर प्रोत्साहनों के अलावा, और 1 जी जैव ईंधन की तुलना में उच्च खरीद मूल्य इंगित करेगी। यह नीति गैर-खाद्य तिलहनों, प्रयुक्त खाना पकाने के तेल और लघु फसलों से जैव-डीजल उत्पादन के लिए आपूर्ति श्रृंखला तंत्र की स्थापना को भी प्रोत्साहित करती है।
नई नीति के साथ, केंद्र आयात निर्भरता में कमी, स्वच्छता फसल जलने और जैव ईंधन में कृषि अवशेषों / कचरे के रूपांतरण, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और अन्य स्वास्थ्य लाभों में कमी के माध्यम से स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देगी।

राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति – 2018

SARTHAK IAS
इस संचार नीति ने भारत के डिजिटल शक्ति वाली अर्थव्यस्था एवं समाज के रूप में संक्रमण की आवश्यकता पर बल दिया है और इसके लिए यह प्रस्ताव दिया गया है कि सर्वव्यापी, लचीली और सस्ती डिजिटल संचार अवसंरचना एवं सेवाओं की स्थापना की जाए. इस प्रकार नागरिकों और उपक्रमों की सूचना एवं संचार सम्बंधित आवश्यकताएँ पूरी हो सकेंगी.
राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 उपभोक्ता-केन्द्रित और app पर चलने वाली नीति होगी जो 5G, IOT, M2M इत्यादि उन्नत तकनीकों के अनावरण के पश्चात् नए-नए विचारों और आविष्कारों की उत्पत्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी.
NDCP नीति के मुख्य लक्ष्य
सभी के लिए ब्रॉडबैंड
डिजिटल संचार प्रक्षेत्र में 40 लाख नये रोजगारों का सृजन
भारत की GDP में डिजिटल संचार प्रक्षेत्र के योगदान को 2017 के 6% से बढ़ाकर 8% करना.
ITU के ICT विकास सूचकांक में 2017 में भारत का स्थान 134वाँ था जिसे बढ़ाकर भारत को शीर्षस्थ 50 देशों में लाना.
ग्लोबल वैल्यू चेन्स में भारत के योगदान में वृद्धि करना.
डिजिटल सार्वभौमता *Digital Sovereignty सुनिश्चित करना.
ये सारे लक्ष्य 2022 तक पा लेने की योजना है.
राष्ट्रीय डिजिटल संचार के उद्देश्य
प्रत्येक नागरिक को 50Mbps पर ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराना.
सभी ग्राम पंचायतों को 2020 तक 1Gbps और 2020 तक 10Gpbs कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना.
उन सभी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी देना जहाँ वर्तमान में यह सुविधा नहीं है.
डिजिटल संचार प्रक्षेत्र में 100 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करना.
नव युग कौशल (New Age Skill) के निर्माण के लिए 10 लाख लोगों को प्रशिक्षण देना.
IoT इको-सिस्टम को 5 billion जुड़ी हुई डिवाइसों तक विस्तारित करना.
डिजिटल संचार के लिए डाटा संरक्षण हेतु एक व्यापक व्यवस्था करना जिससे लोगों की निजता, स्वायत्तता एवं चयन की सुरक्षा हो सकेगी.
वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की कारगर भागीदारी सुनिश्चित करना.
समुचित संस्थागत प्रणालियों के माध्यम से उत्तरदायित्व लागू करना जिससे नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल संचार अवसंरचना एवं सेवाएँ मिल सकें.
राष्ट्रीय संचार नीति के अंतर्गत अपेक्षित कार्रवाइयाँ
राष्ट्रीय फाइबर प्राधिकरण बनाकर एक राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड की स्थापना करना.
सभी नई नगर एवं राजपथ परियोजनाओं के लिए एक सामान्य सेवा प्रणालियाँ (ducts) और उपयोगिता गलियारों (utility corridors) की स्थापना करना.

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